Bharat’s proud Abhinav Bindra: ओलंपिक गेम्स का अगस्त 1896 में ही हो गया था। लेकिन 1900 वह सन था जब पहली बार किसी भारतीय खिलाड़ी ने उसमें हिस्सा लिया हो। ऑफीशियली भारत की ओर से 1920 में एथलीट्स को भेजा गया था लेकिन तब भारत के हिस्से एक भी मेडल ना आ सका। हालांकि कमाल तो तब हुआ जब 1896 के बाद यानी पूरे 112 साल बाद 2008 में, भारत की खुशी का कोई ठिकाना न था जब भारत के अभिनव बिंद्रा ने व्यक्तिगत राइफल 10 मीटर में गोल्ड हासिल किया। यह वह साल था जब भारत को व्यक्तिगत खेल में गोल्ड मेडल मिला। ये अभी तक अपने आप में एक रिकॉर्ड है क्योंकि यह ओलंपिक्स का पहला और इकलौता ऐसा स्वर्ण पदक है जो, व्यक्तिगत खेल से आया हो।
राइफल में पदक लेकर आने के बाद इस खेल की प्रतिष्ठा भी काफी बड़ी। लोग लोग इस खेल के बारे में ज्यादा जानने लगे।
अभिनव बिंद्रा के करियर में इस पदक की तो खास जगह रहेगी। लेकिन अभिनव बिंद्रा ने इसके अलावा भी कई स्वर्ण पदक साथ ही अन्य पदक अपने नाम किए हैं। जिसमें कॉमनवेल्थ गेम एशियन गेम्स के साथ ही अन्य कई वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेले गए खेल शामिल हैं जिनसे उन्हें पदक और साथ ही नाम को नई ऊंचाई मिली।
खास बात यह है कि अभिनव बिंद्रा को राइफल का शौक काफी बचपन से ही था और वे टीवी देख देख कर इस खेल को सीखने लगे। यह उनकी लगन और दृढ़ निश्चय ही था कि वह अपने नाम उसे किताब को कर पाए जो अभी तक केवल उनके ही नाम है।
अपने नाम कई किताब करने के बाद 2000 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। और एक व्यस्क बन 18 साल की उम्र में उन्होंने देश का सबसे बड़ा पुरस्कार अपने नाम किया। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार इन्होंने इतनी कम उम्र में अपने नाम किया। जिसके साथ यह पहले भारतीय एथलीट बन गए जिन्हें इस पुरस्कार से नवाजा गया हो.
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